मेरी दुनिया मेरा परिवार
हर मनुष्य के जीवन की सबसे बड़ी पूंजी उसका परिवार होता है। आज के इस युग में मनुष्य अपने ही जीवन में इतना उलझ कर रह गया है कि उसे अपने जीवन की सबसे कीमती , परिवार की कद्र ही नहीं रही। आजकल मनुष्य सबके साथ होकर भी सबसे अकेला है, क्योंकि वो जीवन के उन खुशियों के पीछे भाग रहा है जो कभी एक समय में मनुष्य को अपने परिवार के साथ वक्त बिताने से मिलता था। पहले मनुष्य के पास धन दौलत कम होता था फिर भी वो खुश, संतुष्ट और सुखी था, परंतु अब मनुष्य पूरी उम्र परिवार का सुख छोड़ धन के पिछे भागता है और जब धन मिल जाता है तब भी वह दुखी ,असंतुष्ट और अकेला रहता है, क्योंकि आज का मनुष्य गरीब है जो अपने अमूल्य परिवार को छोड़ मूल्यवान वस्तुओं के साथ जीता हैं। समय बहोत कीमती है दोस्तो अमूल्य परिवार को छोड़ मूल्यवान वस्तुओं के पीछे मत भागो वरना जीवन बीत जायेगा लेकिन आप खुश , संतुष्ट और सुखी नहीं रह पाएंगे।
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